चास, भाजपा बोकारो विधानसभा का सक्रिय सदस्य सम्मेलन गुरुवार को चास धर्मशाला मोड़ स्थित मारवाड़ी धर्मशाला में हुआ
चास, भाजपा बोकारो विधानसभा का सक्रिय सदस्य सम्मेलन गुरुवार को चास धर्मशाला मोड़ स्थित मारवाड़ी धर्मशाला में हुआ.
मुख्य अतिथि कार्यक्रम प्रभारी सह भाजपा झारखंड के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व हजारीबाग के पूर्व सांसद यदुनाथ पांडेय थे.
श्री पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने देश को एक अलग और अच्छी दिशा दी है.
पीएम मोदी के नेतृत्व में देश में कई लोक कल्याणकारी निर्णय हुए.
नरेंद्र मोदी की सरकार ने अपने 11 वर्षों के कार्यकाल में केवल देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपनी क्षमता का डंका बजवाया है. सम्मेलन की अध्यक्षता चास नगर दक्षिणी मंडल अध्यक्ष के विक्की राय ने की.
औरंगजेब के सामने जब दाराशिकोह का कटा हुआ सिर लाया गया तो वह खून से सना था. औरंगजेब उसे कुछ देरतक देखता रहा और फिर कहा,
इसके खून को साफ कर ठीक से लाया जाए.
हुक्म की तामील हुई और जब इस बार सिर लाया गया तो औरंगजेब ने इसे गौर से देखकर पहचान की और तसल्ली कर लेने के बाद कि कटा हुआ सिर दाराशिकोह का ही है, उसने अगला आदेश दिया. ये आदेश था,
सिर को आगरा ले जाने का…
लेकर विवाद छिड़ा हुआ है।
इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है। यह सारा विवाद छावा फिल्म की वजह से हुआ।
छावा फिल्म बनाने वाले इस विवाद की वजह से कमाई कर रहे हैं, क्योंकि लोग फिल्म देखने जा रहे हैं। लेकिन इस वजह से धार्मिक समुदायों के बीच बहस भी छिड़ गई है।
राजनीतिक लोग इसमें धार्मिक ध्रुवीकरण के मौके तलाश रहे हैं।
इन हालात में कम से कम संभाजी का सही इतिहास जानना बहुत जरूरी है।
संभाजी और औरंगजेब के बीच जो युद्ध हुआ,
उसकी असलियत क्या थी।
फिल्म बनाने वाले इतिहास को अपनी तरह तोड़ मरोड़ कर पेश करते हैं लेकिन इतिहास को तो उसी रूप में पेश करना होगा। तोड़ना-मरोड़ना क्यों।
छावा फिल्म दरअसल औरंगजेब और संभाजी के बीच क्या हुआ उस पर विस्तार से रोशनी डालती है लेकिन हकीकत वो नहीं है जो आपको पर्दे पर नजर आती है। औरंगजेब और संभाजी के बीच विवाद कतई धार्मिक नहीं था बल्कि ये दो राजाओं के बीच सत्ता की लड़ाई थी।
जिससे छावा फिल्म के निर्माताओं ने धर्म की चाशनी में डुबोकर पेश किया है।
संभाजी की असली कहानी मूर्त रूप लेती है सन् 1678 में।
