घर में सिर्फ जयशंकर प्रसाद और उनकी भाभी लखरानी देवी थीं।

हिंदी साहित्य के छायावादी युग के चार स्तंभों में से एक जयशंकर प्रसाद की आज पुण्यतिथि है। बहुत कम लोगों को पता है कि काशी के गोवर्धनसराय में 30 जनवरी 1890 को जन्में जयशंकर प्रसाद दो पत्नियों की मौत के बाद संन्यासी बनना चाहते थे
महाकवि जयशंकर प्रसाद पर स्वतंत्र शोध कर रहे दी बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री और सीनियर एडवोकेट नित्यानंद राय ने उनकी पुण्यतिथि पर उनसे जुड़ी अहम बातें साझा की। एडवोकेट नित्यानंद राय ने बताया कि काशी के कुलीन खानदान में जन्में जयशंकर प्रसाद ने 15 वर्ष की उम्र में मां मुन्नी देवी और 17 वर्ष की उम्र में बड़े भाई शंभूरत्न को खो दिया था।
घर में सिर्फ जयशंकर प्रसाद और उनकी भाभी लखरानी देवी थीं।
वर्ष 1909 में जयशंकर प्रसाद का विवाह विंध्यवासिनी देवी से हुआ था। मगर, टीबी से पीड़ित होने के कारण 1916 में उनका निधन हो गया।
परिजनों की जिद पर जयशंकर प्रसाद ने वर्ष 1917 में दूसरा विवाह विंध्यवासिनी देवी की सगी छोटी बहन सरस्वती देवी से किया। मगर, टीबी से ही पीड़ित होने के कारण वह भी दो वर्ष बाद परलोक सिधार गईं। इससे दुखी होकर जयशंकर प्रसाद ने घर छोड़ दिया और उनकी खोजबीन शुरू हुई।
