गुड़ी पड़वा की सबसे खास परंपरा ‘गुड़ी’ बनाने की होती है। इसे घर के दरवाजे या खिड़की पर लगाया जाता है।

गुड़ी पड़वा के दिन घरों में खास पकवान बनाए जाते हैं।
महाराष्ट्र में और भी रस्में होती हैं।
कुल मिलाकर ये त्योहार समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
आज हम आपको अपने इस लेख में महाराष्ट्र में मनाए जाने वाले गुड़ी पड़वा से जुड़ी परंपराओं और रीति-रिवाजों के बारे में बताने जा रहे हैं।
गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa 2025) महाराष्ट्र के अहम त्योहारों में से एक है।
ये चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है।
इस साल यह 30 मार्च को मनाया जाएगा।
इस दिन नववर्ष की शुरुआत होती है और लोग नए सपनों, आशाओं और उत्साह के साथ इस त्योहार को मनाते हैं।
यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन और नई शुरुआत का प्रतीक होता है।
गुड़ी पड़वा की सबसे खास परंपरा ‘गुड़ी’ बनाने की होती है। इसे घर के दरवाजे या खिड़की पर लगाया जाता है।
इसे बनाने के लिए लकड़ी या बांस की छड़ी ली जाती है।
इसके ऊपरी सिरे पर तांबे या चांदी का कलश उल्टा रख दिया जाता है। इसके बाद इस पर चमकदार बॉर्डर वाली धोती या साड़ी बांधी जाती है। इसे नीम या आम के पत्तों और फूलों की माला से सजाया जाता है।
